Dr. Mansukh Mandaviya जन औषधि के अग्रदूत
श्री नरेंद्र मोदी जी ने भारत का प्रधानमंत्री बनते ही यह कहा था कि उनकी सरकार गांव ,गरीब, किसान, महिलाएं एवं वंचित और हाशिये के लोगों की सरकार होगी। प्रधानमंत्री के तौर पर अपने तकरीबन दस वर्षों के कार्यकाल में मोदी जी ने हर नीति, निर्णय और योजना से इस बात को साबित किया है. सबका साथ सबका विकास मोदी जी के गवर्नेंस का मूलमंत्र रहा है. इसी भावना से प्रेरित होकर मोदी जी ने गरीबों को सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली जेनरिक दवाएं उपलब्ध कराने वाली प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना को लगातार आगे बढ़ाया।
जनऔषधि के अग्रदूत के तौर पर मोदी जी ने जनऔषधि केंद्रों की संख्या को 2014 के 99 केंद्रों के मुकाबले बढ़ाते हुए तकरीबन 11000 से अधिक जनऔषधि केंद्रों तक पहुंचा दिया है. मोदी जी ने गरीबों की सेवा कर रहे इन केंद्रों की संख्या को बढ़ाकर 25000 करने का लक्ष्य रखा है ताकि देश के जन—जन तक सस्ती और उच्च गुणवत्ता की दवाएं पहुंच सकें. मोदी जी के तकरीबन दस वर्षों के कार्यकाल में जनऔषधि योजना कैसे जमीनी स्तर पर जन—जन की सेवा करती हुई रोजगार का माध्यम बनी है और कैसे यह एक मौन क्रांति बनकर दीर्घकालिक बदलावों का माध्यम बन रही है इसकी विस्तृत कहानी इस पुस्तक के जरिए बयां की गई है।