Osho Yudh Aur Shanti
गीता मनुष्य जाति का पहला मनोविज्ञान है, यह पहली " साइकोलॉजी" है। इसलिए उसके मूल्य की बात ही और है। अगर मेरा यश चले, तो कृष्ण को मनोविज्ञान का पिता में कहना चाहूंगा। ये पहले व्यक्ति हैं, जो दुविधाग्रस्त वित्त, "माइण्ड इन कॉफिलक्ट", संतापग्रस्त मन, खण्ड-खण्ड टूटे हुए संकल्प को अखण्ड ओर "इण्टिग्रेट" करने की कोशिश करते हैं। कहें कि वे पहले आदमी है, जो “साइको एनालिसिस" का मनस- विश्लेषण का उपयोग करते हैं। सिर्फ मनस-विश्लेषण का ही नहीं, बल्कि साथ ही एक और दूसरी बात का भी "मनस-संश्लेषण" का भी, 'साइको-सिंथेसिस" का भी।